आखिरी ग़ज़ल

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Desh Ratna

Thursday, November 25, 2010

Desh Ratna's Collection -- Sher-o-Shayari - कश्ती-और-तूफ़ान

अगर ऐ नाखुदा तूफान से लड़ने का दमखम है,
इधर कश्ती को मत लाना, इधर पानी बहुत कम है।

1.नाखुदा - मल्लाह, केवट, नाविक, कर्णधार
2. दमखम - शक्ति, हिम्मत, उत्साह, उमंग, हौसला

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उम्मीदी-नाउम्मेदी का वहम होना वही जाने,
कि जिसने कश्तियों को डूबते देखा हो साहिल पर।
साहिल-किनारा।

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कनारों से मुझे ऐ नाखुदा तुम दूर ही रखना,
तहाँ लेकर चलो तूफां जहाँ से उठने वाला है।

1. नाखुदा - मल्लाह, नाविक, कर्णधार

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कश्ती को भंवर में घिरने दो, मौजों के थपेड़े सहने दे,
जिन्दों में अगर जीना है तुम्हें, तूफान की हलचल रहने दे।
-सागर

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कहा था सबने, डूबेगी यह कश्ती,
मगर हम जानकर बैठे उसी में।
-खलीक बीकानेरी

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किश्ती को तूफान से बचाना तो सहज है,
तूफान के वकार का दिल टूट जायेगा।
-नरेश कुमार 'शाद'

1.वकार - प्रतिष्ठा, इज्जत
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खेलना जब उनको तूफानों से आता ही न था,
फिर वो कश्ती के हमारे, नाखुदा क्यों हो गये।
-'अफसर' मेरठी

1. नाखुदा - मल्लाह, नाविक, केवट, कर्णधार

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खोला है किसने अपने सफीने का बादबां,
तूफां सिमट गये हैं कनारों की गोद में।

1. सफीना - नाव, नौका, कश्ती
2.बादबां - पोतपट, मरूतपट, जहाज में
लगाया जाने वाला पर्दा, जिसमें हवा भरने से जहाज चलता है।

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जब कश्ती साबितो-सालिम थी, साहिल की तमन्ना किसको थी,
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर, साहिल की तमन्ना कौन करे।
-मुइन अहसन 'जज्बी'

1. साबितो-सालिम - ठीकठाक 2. साहिल - किनारा, तट
3. शिकस्ता - टूटी हुई

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जरा थमे जो यह तूफां तो हो कुछ अन्दाजा,
कहाँ हूँ मैं कहाँ कश्ती, कहाँ किनारा है।

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तूफाँ बड़े गरूर से ललकारता रहा,
कश्ती बड़ी नियाज से जिद पर अड़ी रही।
-अब्दुल हमीद 'अदम'

1. नियाज - निष्ठा

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तूफाँ से खेलना अगर इन्सान सीख ले,
मौजों से आप उभरें, किनारे नये-नये।
-'असर' लखनवी

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तूफान कर रहा था मेरे अज्म का तवाफ,
दुनिया समझ रही थी कश्ती भंवर में है।

1.अज्म - संकल्प, साहस, दृढ़, निश्चय
2.तवाफ - परिक्रमा, चक्कर काटना

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तौहीने - जिन्दगी है कनारे की जुस्तजू,
मझदार में सफीना - ए - हस्ती उतार दे।
फिर देख की उसका रंग निखरता है किस तरह
दोशीजए - खिजां को खिताबे – बहार दे।
-अब्दुल हमीद 'अदम'
1.जुस्तजू - तलाश, खोज 2.हस्ती - जीवन नौका 3. दोशीजए-खिजां- पतझड़ रूपी युवती 4.खिताबे–बहार - बहार का नाम या बहार की संज्ञा

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धारे के मुआफिक बहना क्या, तौहीने-दस्तोबाजू है,
पर्रवर्दए-तूफाँ किश्ती को, धारे के मुखालिफ बहने दे।
सागर निजामी

1. मुआफिक - ओर 2. पर्रवर्दए-तूफाँ - तूफान में पले हुए या पली हुई

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पर्वर्द-ए-तूफां इन्सां को, कश्ती की नहीं हाजत,
मौजों के तलातुम में उनको, साहिल नजर आता है।
-जिगर मुरादाबादी

1.पर्वर्द-ए-तूफां - तूफान में पले हुए 2. हाजत - जरूरत, आवश्यकता
3. मौजों - लहरें 4. तलातुम - हलचल 5. साहिल - किनारा, तट

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भरोसा है खुदी पर, नाखुदा की इल्तिजाकैसी,
मेरी कश्ती ही साहिल है, मेरी कश्ती में साहिल है।
-दाग
1.खुदी - स्वयं 2. नाखुदा - मल्लाह, नाविक, कर्णधार
3. इल्तिजा - प्रार्थना, दरखास्त 4. साहिल - किनारा, तट

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मझदार में जब कश्ती पहूँची, कश्ती वालों पै क्या गुजरी,
यह तूफानों की बातें हैं, आसूदा-ए-साहिल क्या जाने।
-जगन्नाथ आजाद

1. आसूदा-ए-साहिल - किनारे पर रहकर संतोष करने वाले

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यूँ ही डूबोता रहा अगर किश्तियाँ सैलाब,
तो सतहे-आब पै चलना भी आ ही जायेगा।

1. सैलाब - बाढ़ 2. सतहे-आब - पानी की सतह

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मरने की दुआयें क्यों माँगू जीने की तमन्ना कौन करे,
ये दुनिया या वो दुनिया अब ख्वाहिशे-दुनिया कौन करे?
जब कश्ती साबितो-सालिम थी, साहिल की तमन्ना किसको थी,
अब ऐसी शिकस्ता कश्ती पर, साहिल की तमन्ना कौन करें?
-मुईन अहसन जज्बी

1.साबितो-सालिम - ठीकठाक, सही हालत में
2.साहिल - किनारा, तट 3.शिकस्ता - टूटी हुई

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मैंने यूं कश्ती का रूख सू-ए-तूफां कर दिया,
साजगारे-दिल हवा-ए-दामने-साहिल न था।
-'अलम' मुजफ्फरनगरी

1.सू-ए-तूफां - तूफान की ओर 2. साजगारे-दिल - दिल के मुआफिक या अनुकूल, जो बात दिल को पसंद आ जाए
3. हवा-ए-दामने-साहिल - साहिल के आँचल की हवा

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